प्रदूषण पर निबंध 100, 150, 250 & 300 शब्दों में (10 lines Essay on Pollution in Hindi)

pollution ek samasya essay in hindi

प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) – प्रदूषण के प्रति जागरूक होना इन दिनों सभी छात्रों के लिए काफी अनिवार्य है। आने वाली पीढ़ियों के लिए दुनिया का एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए हर बच्चे को पता होना चाहिए कि मानवीय गतिविधियाँ पर्यावरण और प्रकृति पर कैसे प्रभाव छोड़ रही हैं। प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) यह विषय काफी महत्वपूर्ण है। और, स्कूली बच्चों को ‘ प्रदूषण निबंध पर (Pollution Essay in Hindi )’ सहजता से एक दिलचस्प निबंध लिखना सीखना चाहिए। नीचे एक नज़र डालें। 

प्रदूषण निबंध 10 पंक्तियाँ (Pollution Essay 10 Lines in Hindi)

  • 1) प्रदूषण प्राकृतिक संसाधनों में कुछ अवांछित तत्वों को मिलाने की क्रिया है।
  • 2) प्रदूषण के मुख्य प्रकार वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और भूमि प्रदूषण हैं।
  • 3) प्रकृति के साथ-साथ मानवीय गतिविधियाँ, दोनों प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं।
  • 4) प्रदूषण के प्राकृतिक कारण बाढ़, जंगल की आग और ज्वालामुखी आदि हैं।
  • 5) प्रदूषण एक राष्ट्रीय नहीं बल्कि एक वैश्विक समस्या है।
  • 6) प्रदूषण को रोकने के लिए पुन: उपयोग, कम करना और पुनर्चक्रण सबसे अच्छे उपाय हैं।
  • 7) अम्ल वर्षा और ग्लोबल वार्मिंग प्रदूषण के परिणाम हैं।
  • 8) प्रदूषण हमेशा जानवरों और इंसानों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
  • 9) प्रदूषित हवा और पानी इंसानों और जानवरों में कई बीमारियों का कारण बनते हैं।
  • 10) हम पर्यावरण के अनुकूल संसाधनों और सौर पैनलों का उपयोग करके प्रदूषण को रोक सकते हैं।

प्रदूषण पर निबंध 100 शब्द (Pollution Essay 100 Words in Hindi)

प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) प्रदूषण इन दिनों एक बड़ी समस्या बन गया है। तेजी से हो रहे औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पर्यावरण जिसमें हवा, पानी और मिट्टी शामिल है, प्रदूषित हो गया है। वनों की कटाई और औद्योगीकरण के कारण, हवा अत्यधिक प्रदूषित हो रही है, और इससे ग्लोबल वार्मिंग हो रही है। आज सभी जल स्रोत अत्यधिक प्रदूषित हैं। कीटनाशकों और उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग ने मिट्टी को बुरी तरह प्रदूषित कर दिया है। पटाखों, लाउडस्पीकरों आदि का प्रयोग। हमारी सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है प्रदूषण का हमारे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। यह सिरदर्द, ब्रोंकाइटिस, हृदय की समस्याओं, फेफड़ों के कैंसर, हैजा, टाइफाइड, बहरापन आदि का कारण बनता है। प्रदूषण के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है। हमें इस मुद्दे को गंभीरता और गंभीरता से लेना होगा।

प्रदूषण पर निबंध 150 शब्द (Pollution essay 150 Words in Hindi)

प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) – यह एक बड़ी पर्यावरणीय समस्या है। जब पर्यावरण दूषित होता है तो प्रदूषण उत्पन्न होता है। पर्यावरण में तीन प्रमुख प्रकार के प्रदूषण हैं। मृदा प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण आदि।

प्रदूषण के कुछ प्रमुख कारण हैं, जैसे ईंधन वाहनों का अत्यधिक उपयोग, कृषि में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग।

प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य को बहुत बुरी तरह प्रभावित करता है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होता है। वायु प्रदूषण से सांस संबंधी बीमारियां और फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं होती हैं। जल प्रदूषण जल को प्रदूषित करता है। ध्वनि प्रदूषण से बीपी की समस्या और सुनने की समस्या होती है। यह तनाव का कारण भी बनता है। मृदा प्रदूषण से फसलों के उत्पादन में कमी आती है, हमें इसे रोकना चाहिए। उत्पादन को भी बनाए रखने के द्वारा। औद्योगिक कचरे का उचित उपचार, वर्षा जल की आपूर्ति का भंडारण, प्लास्टिक उत्पादों को कम करना और इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का उपयोग करना।इस प्रकार के उपाय करके हम प्रदूषण पर भी नियंत्रण कर सकते हैं।

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प्रदूषण पर निबंध 250 शब्दों में – 300 शब्दों में (Essay on pollution in Hindi)

प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi ) प्रदूषण कई अलग-अलग रूपों में होता है। यह पूरी दुनिया में एक प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है। हवा, जमीन, मिट्टी, पानी आदि में कोई भी अप्रिय और अप्रिय परिवर्तन। प्रदूषण में योगदान देता है। ये सभी परिवर्तन रासायनिक, जैविक या भौतिक परिवर्तनों के रूप में हो सकते हैं। प्रदूषण फैलाने वाले माध्यम को प्रदूषक कहते हैं।

दुनिया में प्रदूषण को रोकने के लिए कई कानून बनाए गए हैं। भारत में पर्यावरण की सुरक्षा और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए बनाया गया कानून पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 है।

आइए हम विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों पर विस्तार से एक नज़र डालें:

वायु प्रदुषण

जब पूरा वातावरण आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों के कारण निकलने वाली हानिकारक जहरीली गैसों से भर जाता है, तो इससे वायु और पूरा वातावरण प्रदूषित होता है। इससे वायु प्रदूषण होता है।

यह प्रदूषण का एक और प्रमुख रूप है जो प्रकृति के लिए बहुत विनाशकारी है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि पानी के प्राकृतिक स्रोत दिन-ब-दिन कम होते जा रहे हैं और इसने पानी को एक दुर्लभ वस्तु बना दिया है। दुर्भाग्य से, इन महत्वपूर्ण समय में भी, ये शेष जल स्रोत कई स्रोतों (जैसे औद्योगिक अपशिष्ट, कचरा निपटान आदि) से अशुद्धियों से दूषित हो रहे हैं, जो उन्हें मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त बनाता है।

कचरा प्रदूषण

जब लोग अपशिष्ट निपटान के उचित तंत्र का पालन नहीं करते हैं, तो इसका परिणाम कचरे का संचय होता है। यह बदले में कचरा प्रदूषण का कारण बनता है। इस समस्या का समाधान करने का एकमात्र साधन यह सुनिश्चित करना है कि अपशिष्ट निपटान के लिए एक उचित प्रणाली मौजूद है जो पर्यावरण को दूषित नहीं करती है।

ध्वनि प्रदूषण

ध्वनि प्रदूषण के पीछे सामान्य कारण उद्योग, योजनाओं और अन्य स्रोतों से आने वाली ध्वनि है जो अनुमेय सीमा से अधिक तक पहुँचती है। स्वास्थ्य और शोर के बीच एक सीधा संबंध है जिसमें उच्च रक्तचाप, तनाव से संबंधित आवास, श्रवण हानि और भाषण हस्तक्षेप शामिल हैं।

Pollution Essay से सबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):

Q.1 प्रदूषण के प्रभाव क्या हैं.

A.1 प्रदूषण अनिवार्य रूप से मानव जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। यह हमारे द्वारा पीने वाले पानी से लेकर हवा में सांस लेने तक लगभग सभी चीजों को खराब कर देता है। यह स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचाता है।

प्रश्न 2 प्रदूषण को कैसे कम किया जा सकता है?

उ.2 हमें प्रदूषण कम करने के लिए व्यक्तिगत कदम उठाने चाहिए। लोगों को चाहिए कि वे अपने कचरे को सोच समझकर विघटित करें, उन्हें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। इसके अलावा, जो कुछ वे कर सकते हैं उसे हमेशा रीसायकल करना चाहिए और पृथ्वी को हरा-भरा बनाना चाहिए।

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प्रदूषण की समस्या पर निबंध: Pradushan ki Samasya Par Nibandh for Student

आज के समय में दुनिया प्रदूषण से परेशान है और इसके विभिन्न परिणामों से भी जूझ रही है। इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए सभी देश अब प्रदूषण को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। जिससे प्रदूषण की समस्या पर रोक लग सके। विभिन्न देशों की तरह ही हमारे देश में भी प्रदूषण की ... Read more

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Reported by Dhruv Gotra

Published on 19 February 2024

आज के समय में दुनिया प्रदूषण से परेशान है और इसके विभिन्न परिणामों से भी जूझ रही है। इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए सभी देश अब प्रदूषण को कम करने का प्रयास कर रहे हैं। जिससे प्रदूषण की समस्या पर रोक लग सके। विभिन्न देशों की तरह ही हमारे देश में भी प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए बहुत से कदम उठाये जा रहे हैं। जिनके विषय में हम आगे बात करेंगे। इससे पहले हम जानेंगे की प्रदूषण होता क्या है? साथ ही प्रदूषण के प्रकार, इसके प्रभाव और इसकी रोकथाम के विषय में भी आगे बात करेंगे। आज इस लेख के जरिये हम आप को प्रदूषण की समस्या पर निबंध (Pradushan ki Samasya Nibandh) लिखना बताएंगे –

यह भी पढ़े :- जलवायु परिवर्तन पर निबंध

प्रस्तावना

समय के साथ-साथ विज्ञान में नयी नयी खोजो की मदद से दुनिया ने बहुत तरक्की की है। पहले की तुलना में आज हमारे लिए बहुत से कार्य बेहद सरल हो चुके हैं और हमें अनेक सुविधाएं मिल चुकी है। लेकिन जहाँ हमें एक ओर अनको सुविधाएं मिली वही दूसरी तरफ हमारे लिए दूषित पर्यावरण में रहना दिन प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। इसीलिए कहते हैं की विज्ञान हमारे लिए कभी वरदान तो कभी अभिशाप है। फर्क पड़ता है तो इस बात से कि हम विज्ञान का उपयोग कैसे करते हैं?

यदि हम विवेक पूर्ण तरीके से विज्ञान का उपयोग करते हैं तो हम इससे होने वाले दुष्प्रभावों से बच सकते हैं। इसी तरह हमें विज्ञान से मिले तकनीक का सही और संतुलित इस्तेमाल करके इसके दुष्प्रभाव जैसे की प्रदूषण आदि से बचना होगा। साथ ही अपना भविष्य सुरक्षित रखने के लिए हमें देश दुनिया में फैले प्रदूषण को कम करना होगा।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध | Pradushan ki samasya Par Nibandh for 10th & 12th

प्रदूषण क्या है ? प्रदूषण की समस्या

प्रदूषण का अर्थ होता है कि पर्यावरण में विषैले, हानिकारक और जीवन के लिए खतरा माने जाने वाले तत्वों की अधिकता हो जाती है तो उसे ही प्रदूषण कहते हैं। अन्य शब्दों में समझें तो – जब प्रकृति के संतुलन में दोष उत्पन्न हो जाए तब हम इसे प्रदूषण कह सकते हैं। आज के समय में जल से लेकर वायु तक हमारा वातावरण दूषित हो चुका है। जिसका सीधा प्रभाव पूरी मानव जाति पर पड़ेगा।

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प्रदूषण के प्रकार (Types of Pollution) / प्रदूषण की समस्या

प्रदूषण मुख्य रूप से 4 प्रकार के होते हैं। जिनमें जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, मृदा प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण आते हैं। इसके अतिरिक्त भी अन्य प्रकार के प्रदूषण हैं जो धीरे-धीरे करके आज के समय में मानव जाति के लिए खतरा बन रहे हैं। इनमें हम रेडियोधर्मी प्रदूषण और प्रकाश प्रदूषण को शामिल कर सकते हैं। आइये अब इन प्रदूषणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

1- जल प्रदूषण (Water Pollution)

जल हमारे जीवन के लिए बहुत आवश्यक है। लेकिन वर्तमान समय में जल प्रदूषण के चलते पीने का पानी बहुत ही कम रह गया है। जिसके अनेक कारण हैं। लेकिन जो पीने योग्य उपलब्ध जल राशि है वो भी दूषित होती जा रही है। और इन सब में से मुख्य कारण है – जल का प्रदूषित होना।

Pardushan ki samasya par nibandh for 10th & 12th

बात करें जल प्रदूषण की तो इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि जल निकायों (water bodies) के दूषित होने पर इसे जल प्रदूषण कहते हैं। जैसे कि झील, नदियाँ, समुद्र और भूजल का प्रदूषण आदि भी इसमें शामिल है। ऐसा इसलिए क्योंकि नदियों, जलाशयों, तालाबों आदि में कारखानों के अपशिष्ट व रासायनिक पदार्थ डाले जाते हैं। जिससे पानी दूषित हो जाता है। यही नहीं ये अलग-अलग प्रकार से मानव शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियां उत्पन्न करता है।

2- वायु प्रदूषण (Air Pollution)

आज के समय में कारखानों, विभिन्न मोटर कार, बाइक आदि गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के कारण वातावरण बहुत ही प्रदूषित हो चूका है। सबसे अधिक वायु प्रदूषण गाड़ियों के धुएं से हो रहा है। इसके अतिरिक्त भी बहुत सी विज्ञान द्वारा दी गयी ऐसी तकनीक हैं जिनका इस्तेमाल करने से भी हमारे क्रियाकलापों से वायु प्रदूषण हो रहा है।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध | Pradushan ki samasya Par Nibandh for 10th & 12th

जैसे की सभी को ज्ञात है कि वायु में सभी गैसें एक संतुलित मात्रा में मौजूद है। जो कि सामान्य रूप से इंसानों के लिए हानिकारक नहीं होती, लेकिन यदि किसी कारणवश ये संतुलन बिगड़ जाता है तो इससे वायु प्रदूषित हो जाती है। वायु प्रदूषण का प्रभाव हम दिल्ली, हरियाणा व आस- पास के क्षेत्रों में देख सकते हैं।

3- मृदा / भूमि प्रदूषण (Soil Pollution)

बढ़ती जनसंख्या के साथ-साथ उनके रहने और बसने के लिए धरती से जंगल हटाए जा रहे हैं। साथ ही इतने सभी मनुष्यों के अपशिष्ट व अन्य कचरा का बोझ भी धरती पर ही पड़ता है। जिस से धरती भी प्रदूषित हो रही है। भूमि प्रदूषण के अन्य बहुत से कारण होते हैं।

प्रदूषण की समस्या पर निबंध | Pradushan ki samasya Par Nibandh for 10th & 12th

जैसे कि – खेती में इस्तेमाल होने उर्वरक और कीट नाशक, जिन्हें विभिन्न केमिकलों को मिलाकर बनाया जाता है। ये केमिकल ही धरती की उत्पादकता को खत्म करते हैं। इसके अतिरिक्त दैनिक इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं जिन्हें दूसरी बार इस्तेमाल नहीं कर सकते जैसे कि – प्लास्टिक से बनी हुई वस्तुओं आदि से भी धरती को नुकसान हो रहा है।

4- ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution)

 Pardushan ki samasya par nibandh for 10th & 12th

ध्वनि प्रदूषण का अर्थ आप इसके नाम से ही लगा सकते हैं। इसका अर्थ होता है ध्वनि से होने वाला प्रदूषण। आप ने ध्यान दिया होगा कि सड़कों पर चलने वाले वाहनों से निकलने वाली हॉर्न वाली आवाज़ें और जगह-जगह लगे हुए लाउडस्पीकर से होने वाले आवाज़ से ध्वनि प्रदूषण की मात्रा बढ़ जाती है। जो कि इंसानों में सुनने की क्षमता और मानसिक बीमारियों की जड़ बनती जा रही है। इसके अतिरिक्त अनेक अवसरों जैसे शादी – विवाह, त्योहारों आदि पर लोग पटाखे जलाते हैं व तेज आवाज में संगीत सुनते हैं जिससे ध्वनि प्रदूषण होता है।

5 – रेडियोधर्मी प्रदूषण (Radioactive Pollution)

रेडियोधर्मी प्रदूषण रेडिएशन से होने वाला प्रदूषण है जो कि इंसानों के लिए खतरनाक है। मुख्य रूप रेडियोएक्टिव पदार्थों से निकलने वाले विकिरण जैसे कि यूरेनियम, थोरियम, प्लूटोनियम आदि से रेडियोएक्टिव प्रदूषण होता है।

Pardushan ki samasya par nibandh for 10th & 12th

इसके अलावा दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले गैजेट्स / यंत्र आदि का इस्तेमाल करते हैं जैसे कि मोबाइल फ़ोन व अन्य ऐसे ही यंत्रों का उपयोग करते हैं तो इस से भी नाभिकीय प्रदूषण फैलता है।

6 – प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution)

प्रकाश प्रदूषण को ही फोटो पॉल्यूशन (photo pollution) के नाम से जाना जाता है। इसे चमकदार पॉल्यूशन के नाम से भी जाना जाता है। ये प्रदूषण मुख्य रूप से कृत्रिम प्रकाश के इस्तेमाल से बढ़ रहा है।

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जैसे-जैसे विकास हो रहा है और शहरीकरण बढ़ रहा है, वैसे ही कृत्रिम प्रकाश की मांग भी अनेक अवसर पर बढ़ जाती है। जिस से आस पास के वातावरण पर इसका बुरा प्रभाव भी पड़ने लग गया है। इसका सबसे अधिक प्रभाव हमारे आस पास के जीव जंतुओं पर पड़ता है। जैसे की सड़क किनारे पेड़, उद्यान व उसमें लगे पेड़ पौधे, इसके साथ ही अन्य जीव जंतु जिनमें कीट पतंगे भी शामिल हैं उन पर भी चकाचौंध रौशनी से दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

प्रदूषण के स्रोत और कारण (Sources And Causes Of Pollution)

वर्तमान में मानव जाति विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों से जूझ रही है। जिसके कारण भी कहीं न कहीं हम खुद हैं। आगे दिए गए छोटे-छोटे पॉइंट्स में हम इन कारणों को समझेंगे।

जल प्रदूषण : जल प्रदूषण के मुख्य कारण वर्तमान में निम्न हैं –

  • नदियों, तालाबों व अन्य ऐसे ही जलाशयों में लोग नहाने, कपड़े धोने से लेकर शव बहाने तक का कार्य करते हैं।
  • औद्योगिक कचरा जैसे कि कारखानों से निकलने वाला केमिकल व कचरा आदि नदियों में बहा देते हैं।
  • कृषि में इस्तेमाल होने वाले केमिकल जो कि फसल को बचाने आदि के लिए प्रयोग किये जाते हैं।
  • सीवेज, नदी नालों का पानी जो नदियों में बहा देते हैं। इससे जल दूषित हो जाता है।
  • नदियों के किनारे गंदगी फैलाने से भी उस स्थान के पानी की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
  • इसके अतिरिक्त कचरे के निपटान की अपर्याप्त व्यवस्था और पानी के बेहतर ट्रीटमेंट के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध न होना, आदि।

वायु प्रदूषण : वायु प्रदूषण फैलाने वाले विभिन्न कारण हैं जिनके बारे में आप आगे पढ़ सकते हैं –

  • देश में लगने वाले विभिन्न उद्योगों के कारखानों से निकलने वाला धुआँ।
  • गाड़ियों की बढ़ती संख्या, जिससे धुंए की मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है।
  • वनों की अंधाधुंध कटाई से वातावरण में आक्सीजन में कमी हो रही है। और अन्य हानिकारक गैस बढ़ रही हैं।
  • परमाणु परीक्षण से भी वायु प्रदूषण बढ़ता है।

भूमि प्रदूषण :

  • खेती में फसलों की मात्रा बढ़ाने या उत्पादकता में अधिकता लाने के लिए विभिन्न प्रकारों के केमिकल और उर्वरकों व कीट नाशक केमिकल का प्रयोग करने से भूमि प्रदूषण होता है।
  • ऐसे पदार्थ जो भूमि में अवशोषित नहीं होते जैसे की प्लास्टिक आदि से भूमि प्रदूषण बढ़ता है।
  • कारखानों से निकलने वाला ठोस कचरा।
  • विभिन्न निर्माण जैसे की घर, भवन आदि में इस्तेमाल होने वाले अवशिष्ट पदार्थ का निपटान जैसे कि धातु, कांच, सेरामिक, सीमेंट आदि। ये भूमि में अवशोषित नहीं होते हैं।

ध्वनि प्रदूषण :

  • परिवहन साधन जैसे की सड़कों पर चलने वाली गाड़ियां आदि से उत्पन्न होने वाली आवाज़ें जैसे की हॉर्न की आवाज़।
  • कारखानों में चलने वाली मशीनों की आवाज।
  • जहाँ निर्माण कार्य हो रहा हो। वहां से मशीन आदि की आवाज़।
  • लाउड स्पीकर, डीजे आदि का इस्तेमाल, तेज आवाज़ में रेडियो टीवी या ऐसे ही कोई म्यूजिक सिस्टम का उपयोग।
  • विभिन्न अवसरों पर होने वाली आतिशबाजी।

रेडियोएक्टिव प्रदूषण : खासकर परमाणु रिएक्टरों से होने वाले रिसाव, प्लूटोनियम तथा थोरियम के शुद्धिकरण, आणविक ऊर्जा संयंत्र, औषधि विज्ञान, नाभिकीय प्रयोग, रेडियोधर्मी पदार्थों के उत्खनन व परमाणु बमों के विस्फोट होने पर होता है।

प्रकाश प्रदूषण / फोटोपॉल्यूशन : कृत्रिम लाइट्स का अत्यधिक मात्रा में प्रयोग करना। कुछ खास अवसरों पर अत्यधिक प्रकाश वाली लाइट्स का उपयोग करना। जैसे कि गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली अत्यधिक चमकदार रौशनी वाले बल्ब।

प्रदूषण के बुरे प्रभाव (Effects of Pollution)

वर्तमान में दुनिया भर में लोग प्रदूषण के चलते परेशान हैं। प्रदूषण से बहुत ही हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

  • जल प्रदूषित होने से फसलें खराब होती हैं और साथ ही दूषित पानी किसी भी प्रकार से हमारे शरीर में जाने पर बीमारियों को जन्म देता है। साथ ही जल में रहने वाले जीव जंतुओं को भी नुकसान पहुंचाता है।
  • ध्वनि प्रदूषण से इंसानों में मानसिक अस्थिरता और सुनने की क्षमता में कमी आती है।
  • वायु प्रदूषण से न सिर्फ इंसानों को बल्कि अन्य जी जंतुओं के लिए भी खतरा होता है। इंसानों को सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होने लगती हैं।
  • भूमि प्रदूषण से जमीन की उत्पादकता कम होती है।
  • दूषित पदार्थ खाने से बीमारियां होती हैं, साथ ही अन्य आपदाएं जैसे कि भूस्खलन आदि की समस्या बढ़ जाती है।
  • ओजोन लेयर, जो कि धरती पर जीवन बनाये रखने में मददगार होती है, उसे भी प्रदूषण के कारण नुकसान पहुंचा है।

प्रदूषण रोकने के उपाय (Measures To Prevent Pollution)

वर्तमान में प्रदूषण का स्तर देखते हुए सभी संभव प्रयास करने होंगे की जल्द से जल्द प्रदूषण की समस्या को खत्म किया जा सके। और इसके लिए जो बन पड़े वो सभी को अपने स्तर पर करना होगा। इसके लिए हम निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं –

  • सबसे पहले तो हमें वृक्षारोपण करना होगा। जिससे वायु प्रदूषण को कुछ हद तक कम कर सकें।
  • सीवेज को साफ़ करने के लिए सीवर शोधन यंत्रों का उपयोग कर नगरपालिका इस समस्या से छुटकारा दिला सकती है।
  • किसी भी प्रकार का कूड़ा, कचरा या अवशिष्ट पदार्थों को पानी या खुले स्थान पर न डालें। साथ ही नदियों या जलस्रोतों के पास खासकर कचरा न फैलाएं जिनमें प्लास्टिक या फिर नॉन रीसायकल वाले पदार्थ हों।
  • वृक्षों को लगाने से न केवल वायु प्रदूषण कम होगा बल्कि इससे ध्वनि प्रदूषण भी नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि हरे पेड़ पौधे ध्वनि की तीव्रता को 10 से 15 डी.वी. तक कम करने में सक्षम होते हैं।
  • सार्वजनिक वाहनों का अधिकतर उपयोग करना ज्यादा लाभकारी है। इससे वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और आदि में कमी आएगी।
  • गाड़ियों के इंजन समय-समय पर चेक किये जाएँ व गाड़ियों की रेगुलर मरम्मत की जाए।
  • शहरों की तरफ अत्यधिक पलायन को रोका जाए और इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार उपलब्ध कराये जाए।
  • नदियों और समुद्री तटों की नियमित सफाई कराये जाए।
  • आम नागरिकों को भी अपने स्तर पर प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आगे आना होगा।
  • प्लास्टिक व अन्य ऐसी वस्तुओं का इस्तेमाल बिलकुल बंद कर दिया जाए। सरकार ने इस पर बैन भी लगा दिया है। सभी नागरिकों को इसका पालन करना चाहिए।
  • ऐसा ईंधन प्रयोग करें जिसमें कम से कम धुआं निकले।
  • जनसंख्या वृद्धि को भी नियंत्रित किया जाए।

प्रदूषण की समस्या से जुड़े प्रश्न उत्तर

Pollution / प्रदूषण क्या है कितने प्रकार के होते हैं?

प्रदूषण का अर्थ है कि हमारे वातावरण में दूषित करने वाले तत्वों की अधिकता होना, जो कि मानव जीवन के लिए हानिकारक हो। इसके 5 प्रकार है – वायु प्रदूषण (Air Pollution), ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution),भूमि प्रदूषण (Soil Pollution), जल प्रदूषण (Water pollution), रेडियोधर्मी प्रदूषण (Radioactive Pollution)

वायु प्रदूषण क्या है इसके प्रमुख कारण क्या है ?

जब वायु में मौजूद विभिन्न गैसों की संतुलित मात्रा से अधिक हो जाती है तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं। गैसों के असंतुलन से न सिर्फ मानव जीवन पर फर्क पड़ता है बल्कि पर्यावरण में अन्य जीव जंतुओं के लिए भी ये हानिकारक होता है। इसके प्रमुख कारणों में कारखानों से निकलने वाले धुंए, सड़कों पर चलने वाले गाड़ियों का धुआं आदि।

ध्वनि प्रदूषण क्या होता है ?

ध्वनि प्रदूषण अत्यधिक तीव्र आवाज के कारण होता है। जिससे सामान्य से अधिक आवाज के कारण लोगों को समस्या का सामना करना पड़े।

प्रदूषण का मुख्य स्रोत क्या है?

प्रमुख स्रोतों में ठोस अपशिष्टों का जलना, औद्योगिक कारखाने और खासकर परिवहन के साधन से उठने वाला धुआं हैं।

आज इस लेख में हमने आप को प्रदूषण की समस्या पर निबंध की जानकारी दी हैं। उम्मीद है आप को ये जानकारी उपयोगी लगी होगी। यदि आप ऐसे ही अन्य विषयों पर उपयोगी निबंध पढ़ना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट HINDI NVSHQ से जुड़ सकते हैं।

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प्रदूषण पर निबंध (Pollution Essay in Hindi)

प्रदूषण

वह अवांछित तत्व जो किसी निकाय के संतुलन के प्रतिकूल हो और उसकी खराब दसा के लिए जिम्मेदार हो प्रदूषक तत्व कहलाते हैं तथा उनके द्वारा उत्पन्न विषम परिस्थितियां प्रदूषण कहलाती है। दूसरे शब्दों में “ हमारे द्वारा उत्पन्न वे अपशिष्ट पदार्थ जो पर्यावरण के पारिस्थितिकी तंत्र को असंतुलित कर रहे हैं, प्रदूषक तत्व तथा उनके वातावरण में मिलने से उत्पन्न विभिन्न प्रकार के संकट की स्थिति प्रदूषण कहलाती है। ”

प्रदूषण पर 10 वाक्य || प्रदूषण मानवता को कैसे प्रभावित करता है पर निबंध || शहरीकरण के कारण प्रदूषण पर निबंध

प्रदूषण पर छोटे तथा बड़े निबंध (Short and Long Essays on Pollution in Hindi, Pradushan par Nibandh Hindi mein)

प्रदूषण से संबंधित समस्त जानकारियां आपको इस निबंध के माध्यम से मिल जाएगी। तो आईए इस निबंध को पढ़कर पर्यावरण प्रदूषण के बारे में खुद को अवगत कराएं।

प्रदूषण पर निबंध 1 (300 शब्द) – प्रदूषण क्या है

बचपन में हम जब भी गर्मी की छुट्टियों में अपने दादी-नानी के घर जाते थे, तो हर जगह हरियाली ही हरियाली फैली होती थी। हरे-भरे बाग-बगिचों में खेलना बहुत अच्छा लगता था। चिड़ियों की चहचहाहट सुनना बहुत अच्छा लगता था। अब वैसा दृश्य कहीं दिखाई नहीं देता।

आजकल के बच्चों के लिए ऐसे दृश्य केवल किताबों तक ही सीमित रह गये हैं। ज़रा सोचिए ऐसा क्यों हुआ। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, मनुष्य, जल, वायु, आदि सभी जैविक और अजैविक घटक मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। सभी का पर्यावरण में विशेष स्थान है।

प्रदूषण का अर्थ ( Meaning of Pollution )

प्रदूषण, तत्वों या प्रदूषकों के वातावरण में मिश्रण को कहा जाता है। जब यह प्रदूषक हमारे प्राकृतिक संसाधनो में मिल जाते है। तो इसके कारण कई सारे नकरात्मक प्रभाव उत्पन्न होते है। प्रदूषण मुख्यतः मानवीय गतिविधियों द्वारा उत्पन्न होते है और यह हमारे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। प्रदूषण के द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रभावों के कारण मनुष्यों के लिए छोटी बीमारियों से लेकर अस्तित्व संकट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए पेड़ो की अन्धाधुंध कटाई की है। जिस कारण पर्यावरण असंतुलित हो गया है। प्रदूषण भी इस असंतुलन का मुख्य कारण है।

प्रदूषण है क्या ? ( What is Pollution ?)

जब वायु, जल, मृदा आदि में अवांछनीय तत्व घुलकर उसे इस हद तक गंदा कर देते है, कि स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालने लगे तो उसे प्रदूषण कहते हैं। प्रदूषण से प्राकृतिक असंतुलन पैदा होता है। साथ ही यह मानव जीवन के लिए भी खतरे की घंटी है।

मनुष्य की यह जिम्मेदारी बनती है कि उसने जितनी नासमझी से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है, अब उतनी ही समझदारी से प्रदूषण की समस्या को सुलझाये। वनों की अंधाधुंध कटाई भी प्रदूषण के कारको में शामिल है। अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर इस पर काबू पाया जा सकता है। इसी तरह कई उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर प्रदूषण कम करने के प्रयास किए जा सकते हैं।

अगर हमें अपनी आगामी पीढ़ी को एक साफ, सुरक्षित और जीवनदायिनी पर्यावरण देना है, तो इस दिशा में कठोर कदम उठाने होंगे। और प्रदूषण पर नियंत्रण पाना सिर्फ हमारे देश ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण पृथ्वी के लिए आवश्यक है। ताकि सम्पूर्ण पृथ्वी पर जीवन रह सके।

प्रदूषण पर निबंध 2 (400 शब्द) – प्रदूषण के प्रकार

हमें पहले यह जानना जरुरी है कि हमारी किन-किन गतिविधियों के कारण प्रदूषण दिन प्रति दिन बढ़ रहा है और पर्यावरण में असंतुलन फैला रहा है।

पहले मेरे गांव में ढ़ेर सारे तालाब हुआ करते थे, किन्तु अब एक भी नहीं है। आज हम लोगों ने अपने मैले कपड़ो को धोकर, जानवरों को नहलाकर, घरों का दूषित और अपशिष्ट जल, कूड़ा-कचरा आदि तालाबों में फेंककर इसे गंदा कर दिया है। अब उसका जल कहीं से भी स्नान करने और न ही पीने योग्य रह गया है। इसका अस्तित्व समाप्ति की कगार पर है।

प्रदूषण के प्रकार ( Pradushan ke Prakar )

वातावरण में मुख्यतः चार प्रकार के प्रदूषण हैं –

  • जल प्रदूषण ( Water Pollution )

घरों से निकलने वाला दूषित पानी बहकर नदियों में जाता है। कल-कारखानों के कूड़े-कचरे एवं अपशिष्ट पदार्थ भी नदियों में ही छोड़ा जाता है। कृषि में उपयुक्त उर्वरक और कीट-नाशक से भूमिगत जल प्रदूषित होता है। जल प्रदूषण से डायरिया, पीलिया, टाइफाइड, हैजा आदि खतरनाक बीमारियाँ होती है।

  • वायु प्रदूषण (Air Pollution)

कारखानों की चिमनी और सड़को पर दौड़ते वाहनों से निकलते धुएँ में कार्बन मोनो ऑक्साइड, ग्रीन हाउस गैसें जैसै कार्बन डाई ऑक्साइड, मिथेन, क्लोरो-फ्लोरो कार्बन आदि खतरनाक गैसें निकलती हैं। ये सभी गैसें वायुमंडल को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। इससे हमारे सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। दमा, खसरा, टी.बी. डिप्थीरिया, इंफ्लूएंजा आदि रोग वायु प्रदूषण का ही कारण हैं।

  • ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

मनुष्य के सुनने की क्षमता की भी एक सीमा होती है, उससे ऊपर की सारी ध्वनियां उसे बहरा बनाने के लिए काफी हैं। मशीनों की तीव्र आवाज, ऑटोमोबाइल्स से निकलती तेज़ आवाज, हमारे स्वास्थ्य पर बुरा असर डालती है। इनसे होने वाला प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। इससे पागलपन, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, बहरापन आदि समस्याएं होती है।

  • मृदा प्रदूषण (Soil Pollution)

खेती में अत्यधिक मात्रा में उर्वरकों और कीट-नाशकों के प्रयोग से मृदा प्रदूषण होता है। साथ ही प्रदूषित मिट्टी में उपजे अन्न खाकर मनुष्यों एवं अन्य जीव-जंतुओं के सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी सतह पर बहने वाले जल में भी यह प्रदूषण फैल जाता है।

प्रदूषण को रोकना बहुत अहम है। पर्यावरणीय प्रदूषण आज की बहुत बड़ी समस्या है, इसे यदि वक़्त पर नहीं रोका गया तो हमारा समूल नाश होने से कोई भी नहीं बचा सकता। पृथ्वी पर उपस्थित कोई भी प्राणी इसके प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी  आदि सभी का जीवन हमारे कारण खतरे में पड़ा है। इनके जीवन की रक्षा भी हमें ही करनी है। इनके अस्तित्व से ही हमारा अस्तित्व संभव है।

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प्रदूषण पर निबंध 3 (500 शब्द) – प्रदूषण के कारण

2019 में दीवाली के कुछ दिन बाद ही राजधानी दिल्ली में पॉल्यूशन हॉलीडे हुआ। यह अत्यंत चौंकाने वाली बात थी कि, दिल्ली सरकार को पॉल्यूशन के कारण विद्यालय बंद कराना पड़ा। कितने दुःख की बात है। ऐसी नौबत आ गयी है, अपने देश में।

पर्यावरणीय प्रदूषण आज के टाइम की सबसे बड़ी प्राब्लम है। विज्ञान की अधिकता ने हमारे जीवन को सरल तो बनाया है, साथ ही प्रदूषण बढ़ाने में भी योगदान दिया है। मनुष्य ने अपने लाभ के लिए प्रकृति से बहुत छेड़छाड़ किया है। प्रकृति का अपना नियम होता है, सभी जीव-जंतु उसी नियम के हिसाब से अपना-अपना जीवन-चक्र चलाते हैं, किंतु हम मनुष्यों ने इससे पर्याप्त छेड़-छाड़ किया है, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है।

प्रदूषण के मुख्य कारण (Main Reason for Pollution)

प्रदूषण के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –

  • वनों की कटाई (Deforestation)

बढ़ती जनसंख्या भी एक महत्वपूर्ण कारण हैं, जिस कारण लगातार वनों को काटा गया है।  पर्यावरण प्रदूषण के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक निर्वनीकरण है। वृक्ष ही वातावरण को शुध्द करते हैं। वनोन्मूलन के कारण ही वातावरण में ग्रीन-हाउस गैसों की अधिकता होते जा रही है। जिसके दुष्परिणाम ग्लोबल-वार्मिग के रूप में प्रकट हो रही है। क्योंकि पेड़ ही पर्यावरण में मौजूद कार्बन डाइआऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और आक्सीजन का उत्सर्जन करते हैं।

  • उद्योग-धंधे (Industries)

भोपाल गैस त्रासदी अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड कारखाने में कीटनाशक रसायन को बनाने के लिए मिक गैस का उत्पादन होता था। इस गैस संयंत्र के कारखाने में 2-3 दिसंबर 1984 को जहरीली मिक गैस (मिथाइल आइसो सायनाइड) के रिसाव के कारण कुछ ही घंटो में करीबन 2500 लोगों की जान चली गयी थी और हजारों घायल हुए थे। हजारों जानवरो की भी मृत्यु हो गयी थी। इस घटना को भोपाल गैस त्रासदी के नाम से जाना जाता है।

इस घटना की चर्चा यहाँ इसलिए की, क्योंकि यह औद्योगिकीकरण के कारण हुए प्रदूषण का उदाहरण है। इतना ही नहीं, 6 से 9 अगस्त, 1945 में जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में किए गए एटॉमिक बम अटैक के कारण हुए भयंकर परिणाम से पूरी दुनिया वाक़िफ है। उसके कारण हुए वायु-प्रदूषण से जापान आज तक उबर नहीं पाया है। अटैक के कारण विनाशकारी गैसें सम्पूर्ण वायु-मंडल में समा गयी थी।

वैज्ञानिकों की माने तो औद्योगिकीकरण के नाम पर बीते 100 सालों में 36 लाख टन कार्बन डाइआऑक्साइड वायुमंडल में छोड़ी गयी है, जिस कारण हमारी पृथ्वी का तापमान बढ़ा है। और तो और मौसम में तब्दीलियां भी इसी कारण हो रही हैं, जैसे अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा, अम्लीय वर्षा, बर्फ का पिघलना, समुद्र के जल-स्तर में वृध्दि होना आदि। अकेले अमेरिका विश्व का लगभग 21% कार्बन वायुमंडल में उत्सर्जित करता है।

बढ़ता प्रदूषण आज समूल विश्व का सरदर्द बन चुका है। प्रदूषण के कारण चीजें दिन प्रति दिन बद से बदतर होती जा रही है। चूँकि पूरा विश्व इसके प्रति गंभीर है। लोगों में जागरुकता फैलाने के लिए हर साल पर्यावरण दिवस, जल दिवस, ओजोन दिवस, पृथ्वी दिवस, जैव विविधता दिवस आदि मनाये जाते है। समय-समय पर पर्यावरण के संरक्षण के लिए स्कॉटहोम सम्मेलन, मॉट्रियल समझौता आदि होता रहा है।

Pollution Essay in Hindi

प्रदूषण पर निबंध 4 (600 शब्द) – प्रदूषण के प्रकार व रोकथाम

आज के समय में प्रदूषण एक वैश्विक समस्या बन चुका है। इसने हमारे पृथ्वी को पूर्ण रुप से बदल कर रख दिया है और दिन-प्रतिदिन पर्यावरण को क्षति पहुंचाते जा रहे है, जोकी हमारे जीवन को और भी ज्यादे मुश्किल बनाते जा रहा है। कई तरह के जीव और प्रजातियां प्रदूषण के इन्हीं हानिकारक प्रभवों के कारण धीरे-धीरे विलुप्त होते जा रहीं है।

प्रदूषण के प्रकार (Types Of Pollution)

1. वायु प्रदूषण (Air Pollution)

वायु प्रदूषण को सबसे खतरनाक प्रदूषण माना जाता है, इस प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों और वाहनों से निकलने वाला धुआं है। इन स्त्रोतों से निकलने वाला हानिकारक धुआं लोगो के लिए सांस लेने में भी बाधा उत्पन्न कर देता है। दिन प्रतिदिन बढ़ते उद्योगों और वाहनों ने वायु प्रदूषण में काफी वृद्धि कर दी है। जिसने ब्रोंकाइटिस और फेफड़ो से संबंधित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं खड़ी कर दी है।

2. जल प्रदूषण (Water Pollution)

उद्योगों और घरों से निकला हुआ कचरा कई बार नदियों और दूसरे जल स्त्रोतों में मिल जाता है, जिससे यह उन्हें प्रदूषित कर देता है। एक समय साफ-सुथरी और पवित्र माने जानी वाली हमारी यह नदियां आज कई तरह के बीमारियों का घर बन गई है क्योंकि इनमें भारी मात्रा में प्लास्टिक पदार्थ, रासयनिक कचरा और दूसरे कई प्रकार के नान बायोडिग्रेडबल कचरे मिल गये है।

3. भूमि प्रदूषण (Soil Pollution)

वह औद्योगिक और घरेलू कचरा जिसका पानी में निस्तारण नही होता है, वह जमीन पर ही फैला रहता है। हालांकि इसके रीसायकल तथा पुनरुपयोग के कई प्रयास किये जाते है पर इसमें कोई खास सफलता प्राप्त नही होती है। इस तरह के भूमि प्रदूषण के कारण इसमें मच्छर, मख्खियां और दूसरे कीड़े पनपने लगते है, जोकि मनुष्यों तथा दूसरे जीवों में कई तरह के बीमारियों का कारण बनते है।

4. ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)

ध्वनि प्रदूषण कारखनों में चलने वाली तेज आवाज वाली मशीनों तथा दूसरे तेज आवाज करने वाली यंत्रो से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही यह सड़क पर चलने वाले वाहन, पटाखे फूटने के कारण उत्पन्न होने वाला आवाज, लाउड स्पीकर से भी ध्वनि प्रदूषण में वृद्धि होती है। ध्वनि प्रदूषण मनुष्यों में होने वाले मानसिक तनाव का मुख्य कारण है, जोकि मस्तिष्क पर कई दुष्प्रभाव डालने के साथ ही सुनने की शक्ति को भी घटाता है।

5. प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution)

प्रकाश प्रदूषण किसी क्षेत्र में अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे रोशनी उत्पन्न करने के कारण पैदा होता है। प्रकाश प्रदूषण शहरी क्षेत्रों में प्रकाश के वस्तुओं के अत्यधिक उपयोग से पैदा होता है। बिना जरुरत के अत्याधिक प्रकाश पैदा करने वाली वस्तुएं प्रकाश प्रदूषण को बढ़ा देती है, जिससे कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।

6. रेडियोएक्टिव प्रदूषण (Radioactive Pollution)

रेडियोएक्टिव प्रदूषण का तात्पर्य उस प्रदूषण से है, जो अनचाहे रेडियोएक्टिव तत्वों द्वारा वायुमंडल में उत्पन्न होता है। रेडियोएक्टिव प्रदूषण हथियारों के फटने तथा परीक्षण, खनन आदि से उत्पन्न होता है। इसके साथ ही परमाणु बिजली केंद्रों में भी कचरे के रुप में उत्पन्न होने वाले अवयव भी रेडियोएक्टिव प्रदूषण को बढ़ाते है।

7. थर्मल प्रदूषण (Thermal Pollution)

कई उद्योगों में पानी का इस्तेमाल शीतलक के रुप में किया जाता है जोकि थर्मल प्रदूषण का मुख्य कारण है। इसके कारण जलीय जीवों को तापमान परिवर्तन और पानी में आक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है।

8. दृश्य प्रदूषण (Visual Pollution)

मनुष्य द्वारा बनायी गयी वह वस्तुएं जो हमारी दृष्टि को प्रभावित करती है दृष्य प्रदूषण के अंतर्गत आती है जैसे कि बिल बोर्ड, अंटिना, कचरे के डिब्बे, इलेक्ट्रिक पोल, टावर्स, तार, वाहन, बहुमंजिला इमारते आदि।

विश्व के सर्वाधिक प्रदूषण वाले शहर (Most Polluted City of The World)

एक तरफ जहां विश्व के कई शहरों ने प्रदूषण के स्तर को कम करने में सफलता प्राप्त कर ली है, वही कुछ शहरों में यह स्तर काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। विश्व के सबसे अधिक प्रदूषण वाले शहरों की सूची में कानपुर, दिल्ली, वाराणसी, पटना, पेशावर, कराची, सिजीज़हुआन्ग, हेजे, चेर्नोबिल, बेमेन्डा, बीजिंग और मास्को जैसे शहर शामिल है। इन शहरों में वायु की गुणवत्ता का स्तर काफी खराब है और इसके साथ ही इन शहरों में जल और भूमि प्रदूषण की समस्या भी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिससे इन शहरों में जीवन स्तर काफी दयनीय हो गया है। यह वह समय है जब लोगों को शहरों का विकास करने के साथ ही प्रदूषण स्तर को भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

प्रदूषण कम करने के उपाय (Tips for Preventing Pollution)

जब अब हम प्रदूषण के कारण और प्रभाव तथा प्रकारों को जान चुके हैं, तब अब हमें इसे रोकने के लिए प्रयास करने होंगे। इन दिये गये कुछ उपायों का पालन करके हम प्रदूषण की समस्या पर काबू कर सकते है।

1. कार पूलिंग

2. पटाखों को ना कहिये

3. रीसायकल/पुनरुयोग

4. अपने आस-पास की जगहों को साफ-सुथरा रखकर

5. कीटनाशको और उर्वरकों का सीमित उपयोग करके

6. पेड़ लगाकर

7. काम्पोस्ट का उपयोग किजिए

8. प्रकाश का अत्यधिक और जरुरत से ज्यादे उपयोग ना करके

9. रेडियोएक्टिव पदार्थों के उपयोग को लेकर कठोर नियम बनाकर

10. कड़े औद्योगिक नियम-कानून बनाकर

11. योजनापूर्ण निर्माण करके

प्रदूषण दिन-प्रतिदिन हमारे पर्यावरण को नष्ट करते जा रहा है। इसे रोकने के लिए हमें जरुरी कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि हमारी इस पृथ्वी की खूबसूरती बरकरार रह सके। यदि अब भी हम इस समस्या का समाधान करने बजाए इसे अनदेखा करते रहेंगे, तो भविष्य में हमें इसके घातक परिणाम भुगतने होंगे।

FAQs: Frequently Asked Questions

उत्तर – भारत का सबसे अधिक प्रदूषित राज्य राजधानी नई दिल्ली है।

उत्तर – भारत में सबसे कम प्रदूषित शहर मिजोरम का लुंगलेई शहर है।

उत्तर – विश्व का सबसे कम प्रदूषित देश डेनमार्क है।

उत्तर –जल प्रदूषण की मात्रा BOD (Biological Oxygen Demand) से मापी जाती है। 

उत्तर –भारत में प्रदूषण नियंत्रण “केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड” के अंतर्गत आता है।

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